
यह ट्यूटोरियल बताता है कि कैसे कहानियों को रचनात्मक गतिविधियों—जैसे ड्राइंग, प्ले-डो से बनाना, या कावड़ बॉक्स जैसे कहानी उपकरणों के साथ जोड़कर—पढ़ने के समय को और मज़ेदार व रोचक बनाया जा सकता है।
टीचर-लाइब्रेरियन बृंदा पंडित और दर्पणा चौधरी बारिया बताती हैं कि ये हाथों से की जाने वाली गतिविधियाँ बच्चों को कहानी से जोड़ती हैं, उन्हें अपनी समझ व्यक्त करने में मदद करती हैं और कहानी को उनकी असल ज़िंदगी से जोड़ देती हैं।
Keywords: ब्रिंदा पंडित, दर्पणा चौधरी बारिया, कहानी-कथन, रचनात्मक गतिविधियाँ, छात्र सहभागिता, जोर से पढ़कर सुनाना, प्लेडो गतिविधियाँ, चित्रांकन और कला, कावड़ बॉक्स, सांस्कृतिक कहानी-कथन, कल्पनाशक्ति, कहानी से जुड़ाव, लाइब्रेरी सहभागिता, वस्तु-आधारित कहानी-कथन, टिप्स की टोकरी